humanity - इंसानियत
## इंसानियत पर सुविचार (Thoughts on Humanity)
इंसानियत सबसे बड़ा मज़हब या धर्म है। यह किसी ख़ास उपासना,इबादत, बंदगी या रीति-रिवाज का नाम नहीं, बल्कि दूसरे के दर्द को समझने और उसकी मदद करने का नाम है। नीचे कुछ विचार present हैं:
– सच्ची उदारता वही है जो बिना के दूसरे के काम आए। जब हम किसी की परेशानी को अपनी पीड़ा परेशानी समझते हैं, तभी हम सच्चे इंसान कहलाते हैं।
2. "कोई इतना गरीब नहीं कि वह एक अच्छी सोच न दे सके, और कोई इतना अमीर नहीं कि उसे एक जरूरतमंद हाथो की जरूरत न पड़े।"
– इंसानियत का कोई मोल नहीं होता। एक छोटी सी मुस्कान, एक गर्मजोशी भरा आलिंगन / आग़ोशी या जरूरतमंद के लिए एक वक्त का खाना या भोजन – यह सब इंसानियत के बेशक़ीमत रतन हैं।
3. "सच्ची इंसानियत यह नहीं कि आपने किसी को कितना दिया, बल्कि यह है कि आपने कितनी नेक दिली और सम्मान के साथ दिया।"**
– अक्सर लोग ख़ैरात / दान करते हैं, लेकिन साथ में अहसान का हिसाब भी देते हैं। इंसानियत तो तब है जब आप किसी की मदद करते हुए उसकी इज्जत को बनाए रखें।
4. "जहाँ प्यारऔर मोहब्बत है, वहीं रब की मेहरबानी है। जहाँ ये नहीं, वहाँ सिर्फ दीवारें हैं।"
– मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर – ये सब पत्थर की इमारतें हैं। असली इबादत या पूजा तब होती है जब हम एक भूखे को रोटी खिलाएं, एक बीमार का उसकी बीमारी का इलाज करने में मदत करें
5. **"इंसानियत का चिराग़ तभी जल जाता है, जब हम अपने घमड़ और खुदगर्जी को घी की तरह उसमें डालते हैं।"**
– हमारे भीतर का 'मैं' ही सबसे बड़ी रुकावट है। जब हम 'मैं' को छोड़कर 'हम' बन जाते हैं, तभी इंसानियत कई रस्ते खुलते है।
6. "पैसे से भूख मिट सकती है, लेकिन प्यास नहीं। इंसानियत से ही सूखे दिलों को हरियाली मिलती है।"
– दौलत से सुख-चैन खरीदी जा सकती हैं, लेकिन प्यार, मेहरबानी और भरोसा नहीं खरीदे जा सकते। यह सब इंसानियत की ही देन है।
7. "हर धर्म हमें सिखाता है कि दूसरों के लिए जियो, क्योंकि खुद के लिए तो जानवर भी जीते हैं।"
– यह जिंदगी का सबसे बड़ा सत्य है। जानवर अपनी भूख, प्यास और नींद के लिए जीते हैं। मनुष्य की पहचान तो यह है कि वह दूसरों के लिए क्या करता है ?
8. किसी शायर ने ठीक कहा है की --
"इंसानियत जो कुछ खो सी गई है, कहाँ ढूंढू इसे, क्यूँ थोड़ी रूठ सी गई है।
इंसान को उसकी इंसानियत से ही पहचाना जाता है, दूसरे चोले तो औरों के भी पास मिलेंगे।
ये रहमत ख़ुदा की है जो खुद की पहचान में खुद से मिलने की वज़ह बनेगें।
मुश्किल कोई नहीं है, शायद बस थोड़ा रास्ता भटक गए है।
भागते भागते कुछ चंद चीज़ों के पीछे इंसानी खूबसूरती को भूल गए है।
ये गहना है, श्रृंगार है इंसानों का, जो उसे खुद से जोड़ कर रखता है,
वरना तो कब के बिख़र गए होते हम, अगर इंसानियत का सहारा नहीं मिला होता।"
9. तेज रफ्तार से भागती आज की हाईटेक दुनिया में अगर कोई सबसे महंगी चीज है, तो वो है इंसानियत। जो मौजूदा वक्त में लगभग विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुकी है। इंसान का इंसान से विश्वास उठ रहा है। मगर हमारी और आपकी इसी मोह मायाबी दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी मौजूद हैं, जो अपने इरादों और कारनामों से बुझती उम्मीद को रोशन कर इंसानियत को अमर कर जाते हैं। दूसरों की मदद ही उनकी जिंदगी का मकसद होता है।
10. जब कोई इंसान सामने वाले की संवेदना, एहसास, जज़्बात, मनोभाव को आहत करके उसे इस प्रकार दुख देता है जिसका उसे कोई अफसोस भी न हो, तो उस इंसान की इंसानियत खत्म हो जाती है। इंसानों में न तो इंसानियत खत्म हुई है ना ही इसे खत्म किया जा सकता है । lekin हां , इंसानों के बीच की दिलों की दूरियां बढ़ गई है । आज इंसान एक दूसरे को शक की नजर से ज्यादा देख रहा है । और शायद इसके लिए कुछ तथाकथित धार्मिक , राजनैतिक और सामाजिक और कुछ हद तक आर्थिक नेता जिम्मेदार हैं ।
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